| प्रदेश कोषाध्यक्ष-1 पद | श्री अरुण कुमार पोद्दार जी - पूसा समस्तीपुर |
प्रदेश कोषाध्यक्ष (State Treasurer) किसी संगठन के प्रदेश संगठन में वित्तीय मामलों का प्रमुख होता है।
यह पद अत्यंत जिम्मेदारी और पारदर्शिता की मांग करता है, क्योंकि यह पार्टी के वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ा होता है।
प्रदेश कोषाध्यक्ष के प्रमुख कार्य एवं कर्तव्य:
1. वित्तीय प्रबंधन:
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प्रदेश इकाई की आय और व्यय का पूरा रिकॉर्ड रखना।
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फंड प्राप्ति और खर्च की निगरानी करना।
2. लेखा पुस्तकों का संधारण:
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सभी लेन-देन को सुव्यवस्थित तरीके से दर्ज करना।
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पार्टी की लेखा पुस्तकों को अद्यतित और पारदर्शी रखना।
3. वार्षिक बजट तैयार करना:
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पार्टी की गतिविधियों के लिए वार्षिक बजट बनाना।
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प्रस्तावित बजट को प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्तुत करना।
4. फंड जुटाना (Fundraising):
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पार्टी के लिए अधिकृत तरीकों से चंदा या आर्थिक सहायता एकत्र करना।
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दाताओं की जानकारी दर्ज करना और उसका रिकॉर्ड रखना।
5. वित्तीय रिपोर्टिंग:
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पार्टी हाईकमान या केंद्रीय कोषाध्यक्ष को नियमित वित्तीय रिपोर्ट भेजना।
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चुनाव आयोग या अन्य नियामक संस्थाओं को आवश्यक वित्तीय विवरण देना।
6. भुगतान और अनुमोदन:
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संगठन के खर्चों की जांच और अनुमोदन करना (यदि प्राधिकृत हो)।
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किसी भी वित्तीय लेन-देन के लिए ज़रूरी अनुमतियाँ सुनिश्चित करना।
7. लेखा-परीक्षण (Audit):
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समय-समय पर पार्टी की वित्तीय स्थिति का आंतरिक या बाह्य ऑडिट कराना।
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ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई त्रुटियों को सुधारना।
8. वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना:
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पार्टी के अंदर पारदर्शी और उत्तरदायी वित्तीय प्रणाली सुनिश्चित करना।
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किसी भी वित्तीय अनियमितता को रोकना और उचित रिपोर्ट करना।
संक्षेप में:
प्रदेश कोषाध्यक्ष पार्टी के वित्तीय स्तंभ होते हैं — उनकी जिम्मेदारी यह है कि संगठन के संसाधनों का सही उपयोग हो, सब कुछ पारदर्शी और नियमानुसार चले, और किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी से संगठन की छवि को नुकसान न हो।